नई दिल्ली (संवाददाता)। देश में कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन क्षेत्र ने जुलाई 2026 में भी तेज़ विकास की रफ्तार बनाए रखते हुए उत्पादन और आपूर्ति दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2026 के दौरान इन खदानों से 14.78 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ, जबकि 17.49 मिलियन टन कोयले की ढुलाई (आपूर्ति) की गई।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 की तुलना में इस वर्ष जुलाई में कोयला उत्पादन में 9.61 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि खनन गतिविधियों में सुधार, बेहतर परिचालन दक्षता तथा घरेलू कोयला उत्पादन में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों के बढ़ते योगदान को दर्शाती है।कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि खनन क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा उपलब्ध खनन क्षमता के प्रभावी दोहन का परिणाम है। उत्पादन और आपूर्ति में लगातार हो रही वृद्धि से देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए घरेलू कोयले की उपलब्धता और मजबूत होगी। मंत्रालय का मानना है कि कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से उत्पादन में निरंतर वृद्धि होने से आयातित कोयले पर निर्भरता घटेगी। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और महत्वपूर्ण कच्चे माल के मामले में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय प्रगतिशील नीतियों, प्रभावी नियामक व्यवस्था और सभी हितधारकों के सहयोग से उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करने तथा देश की बढ़ती ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य करता रहेगा।


