होर्मुज की बारूदी सुरंगे भी नहीं कर पाएंगी कुछ, भारत ने समुद्र में उतार दिया खतरनाक युद्धपोत

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नई दिल्ली (संवाददाता)।  ईरान ने अमेरिका से तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट में समुद्र के अंदर बारूदी सुरंगे लगाई हुई हैं। जब भी कोई जहाज उससे टकराता है तो वह तबाह हो जाता है, लेकिन भारत ने ऐसा खतरनाक पनडुब्बी रोधी युद्धपोत समुद्र में उतार दिया है, जिसका ये समुद्री बारूदी सुरंगे बाल भी बांका नहीं कर पाएंगी। दरअसल, भारतीय नौसेना के लिए देश में ही बनाए जा रहे आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों में से सातवें, मछलीपट्टनम का बुधवार को जलावतरण किया गया।
मछलीपट्टनम को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया जा रहा है और इसका जलावतरण गुलरुख आनंद ने किया। इस मौके पर सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव, वाइस एडमिरल अतुल आनंद भी मौजूद थे। समारोह में भारतीय नौसेना, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य विशेष मेहमानों ने हिस्सा लिया।
‘मछलीपट्टनम’ का गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसका नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपट्टनम से लिया गया है, जो भारत के पूर्वी तट पर अपनी समृद्ध समुद्री विरासत और फलते-फूलते व्यापार के लिए जाना जाता है। यह जहाज मछलीपट्टनम की भावना और विरासत को गौरव के साथ दर्शाता है, साथ ही देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। यह युद्धपोत पानी के नीचे निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान और कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन के साथ-साथ समुद्री सुरंगों से निपटने की क्षमता से लैस है। यह तटीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा समुद्री क्षेत्र के संबंध में जागरूकता बढ़ाएगा। ‘मछलीपट्टनम’ का जलावतरण प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन में एक और मील का पत्थर है और रक्षा निर्माण में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करता है। यह युद्धपोत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ भारतीय जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करता है और हिंद महासागर क्षेत्र में देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना की संचालन तैयारी को बढ़ाएगा।