उत्तराखंड में बेलगाम होते हुए अधिकारियों की वजह क्य है इनको सुधारने की दवा क्या है ?

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खबर सार 

पशु प्रेमियों ने दिया सीईओ ऑफिस कैंटोनमेंट बोर्ड देहरादून के दफ्तर में धरना ! 

घंटों धरने पर बैठने के बाद भी मुख्य अधिशासी अधिकारी ने नहीं सुनी फरियाद दिखाया तानाशाही रवैया मिलने से किया इनकार फोन भी नहीं उठाया !

आपको बता दें की कुणाल ग्रोवर पिछले कई वर्षों से अपने सहयोगियों के साथ मिलकर देहरादून कैंट क्षेत्र में बेसहारा पशुओं की सेवा कर रहे हैं !

जिसमें घायल और बीमार पशुओं का उपचार किया जाता है !

कुणाल ग्रोवर ने कहा जबकि यह कार्य छावनी परिषद, राज्य सरकार ,व केंद्र सरकारों ,द्वारा किया जाना चाहिए पर किया नहीं जाता !

हम मानवता को सर्वोपरि रखते है मिलकर इन पशुओं का इलाज करते हैं इन पशुओं के लिए छावनी परिषद की ओर से कोई कार्य नहीं किया जाता !

जब आज हम कुछ पशु प्रेमी छावनी परिषद में इन पशुओं के लिएआश्रय उन घायल पशुओं के लिए एंबुलेंस व जो पशुपालक अपने पशुओं को बेसहारा छोड़ देते हैं उन पशु पालकों के विरुद्ध कारवाई की मांग को लेकर छावनी परिषद गए थे !

 तो छावनी परिषद के अधिशासी अधिकारी द्वारा हमारे साथ अभद्र व्यवहार किया गया कई घंटों धरने पर बैठने के बाद भी अधिकारी द्वारा और हमारी बात नहीं गई !

यहां तक की मुख्य अधिशासी अधिकारी दफ्तर में होने के बावजूद भी दफ्तर के बाहर आने को तैयार नहीं थे !

और हमसे ही नहीं मीडिया वालों से भी बात करने को तैयार नहीं थे फोन तक नहीं उठाया साफ तौर पर यह एक तानाशाही है और कुछ नहीं  ! 

पशु प्रेमियों द्वारा कहा गया कि हम चुप बैठने वाले नहीं हैं यह तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे !

 हमारे द्वारा आगे भी यहां आकर धरना दिया जाएगा जब तक कैंटोनमेंट बोर्ड आवारा पशुओं के लिए घर नहीं बना देता या उनके साथ क्रूरता करने वालों पर चालान की प्रक्रिया शुरू नहीं करता तब तक हम इसी तरह से आंदोलन करते रहेंगे !

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